hindi sex stories चाची की मस्त चुदाई भाग २

Discussion in 'Hindi Sex Stories' started by desimirchi, Mar 27, 2017.

  1. desimirchi

    desimirchi Administrator Staff Member

    Chachi Ki Mast Chudai Part 2 :

    उसी दिन रात को मैंने जान बुझ कर पपू के साथ झगडा कर दिया, तो रत को फिरसे चाची हमारे बिचमे सोगयी, मैंने चाची और पपू के सोने का इंतज़ार किया और एक बजे उठा तो पाया की दोनो सोगये हे, मैं उनके चूची को दबाते गया. थोड़ी देर बाद चाची की सांस तेज़ चलने लगी,मुझे लगा की सायद चाची जगी हुई है, मैंने उनके साडी को ऊपर उठाया और अपना लंड बहार निकलके उनके ऊपर चड़ने की कोसिस किया तो उन्होंने ऊपर जाने नहीं दिया. सायद पपू जग जायेगा इस डर से, वो मेरी तरफ मुह करके सो गयी, मैं थोडा निचे खिसका और उनके दोनो पेरो को खोला और अपना लंड उनके चूत में घुसा दिया.

    अब मैंने अपना लंड उनके मुहं से निकाला और उनकी चूत को चाटने लगा, उनके चूत के रस में क्या गज़ब का स्वाद था, अब मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रखा और एक जोर का झटका लगाया, एक ही झटके में पूरा लंड उनकी चूत के अंदर चला गया, उनकी आह निकल गयी, अब मैंने आंटी को अलग अलग पोजीशन से खूब चोदा, उस दिन हमलोगों ने करीब ३ बार चुदाई की|

    मै ब्रा के ऊपर से ही उनकी चुचियों को मसलने लगा, और वो मादक आवाजें निकालने लगी, आह उह आह की आवाजें पुरे कमरे में गूंज रही थी, फिर मैंने उनकी पैंटी निकाल दी और उनकी चूत पर हाथ फेरने लगा, उन्होंने मेरा सारा कपड़ा अपने हाथों से निकाल दिया और मेरे लंड पकड़कर सहलाने लगी और चूसने लगी. ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड, लंड न होकर केला हो|

    अब उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा हुआ था और अब में थोड़ा डर गया था, लेकिन मुझे मज़ा भी आ रहा था, क्योंकि मैंने पहली बार उनकी त्वचा को छुआ था,

    लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हुई, क्योंकि सभी वहाँ बैठे हुए थे और में नहीं जानता था कि उनको अच्छा लगेगा या बुरा। फिर कुछ देर के बाद उन्होंने मेरा एक हाथ अपनी कमर पर रख दिया, लेकिन मैंने अपना हाथ सरका लिया। अब मेरा हाथ उनकी चूत पर था और अब में बहुत गर्म हो गया था और उनकी चूत ढूँढने लगा था, लेकिन उनकी साड़ी की वजह से नहीं ढूँढ पा रहा था।

    फिर मैंने धीरे-धीरे अपने पैर से उनके पैर को टच करना शुरू किया, उउउफफफफफ्फ़ क्या चीज़ थी मेरी मामी? में आपको नहीं बता सकता। अब वो भी मेरा साथ देने लगी थी। फिर में अपना पैर धीरे-धीरे उनके घुटनों तक ले आया, उफ़ क्या मखमली स्पर्श था? अब हम दोनों एक दूसरे को पैर से सहलाने लगे थे। फिर ये सिलसिला चलता रहा,

    वो थोड़ी हिल्ली फिर चुप चाप पड़ी रही, मै अपने कमर को आगे पीछे करता रहा, तक़रीबन 10 मिनट , के बाद मुझे अजीब सा लगा और बहुत मज़ा लगा,ऐसे हि करते करते मेरे लंड में कुछ कुछ होने लगा.

    वो मेरी पहली चुदाई थी तो मुझे पता नहीं था कब झाड़ते है,लेकिन कुछ टाइम बाद मैंने लंड बहार निकल दिया, तब मेरा वीर्य नहीं निकलता था, फिर मैंने अपने लंड को अन्दर डाला और सो गया.
     

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